जब भी कोई बच्चा इस दुनिया में प्रवेश करता है तो प्राय सभी व्यक्ति चाहते है कि उनकी संतान राजसी ठाठ व उच्च अधिकारी व यशस्वी बने | इसलिए हमे उन की कुंडली में शुभ योग देखने होगे |शुभ योग जातक को कहा से कहा तक पहुचा सकता है |व राज योग कैसे बनता है | नीचे बताया गया है |
कुंडली में प्रथम ,चातुर्थ,सप्तम ,और दशम जो कन्द्रे स्थान है | उन्हें विष्णु स्थान माना जाता है पंचम व नवम भाव को लक्ष्मी स्थान माना जाता है | केन्द्र व त्रिकोण के योग को लक्ष्मी विष्णु योग भी कहते है | जिससे व्यक्ति को अपार धन सम्पत्ति प्राप्त होती है | चल अचल सम्पत्ति भवन ,भूमि व वाहन का अपार सुख मिलता है |ऐसा व्यक्ति सफल नेता ,उच्च अधिकारी या सफल उद्योगपति होता है |
१ .जब नवमेश व दशमेश नवम स्थान में हो तो प्रबल "राजयोग" बनता है
२.यदि नवमेश और दशमेश दोनों दशम में हो तो प्रबल "राजयोग" बनाते है
३.कुंडली में नवम स्थान भाग्य व दशम स्थान कर्म का स्थान है | व्यक्ति अपने कर्म से भाग्य निर्माण करता है