Saturday, 6 September 2014

जन्म कुण्डली में राज योग


जब भी कोई बच्चा इस दुनिया में प्रवेश करता है तो प्राय सभी व्यक्ति चाहते है कि उनकी संतान राजसी ठाठ व उच्च अधिकारी व यशस्वी बने | इसलिए हमे उन की कुंडली में  शुभ योग देखने होगे |शुभ योग जातक को कहा से कहा तक पहुचा सकता है |व राज योग कैसे बनता है | नीचे बताया गया है |

कुंडली में प्रथम ,चातुर्थ,सप्तम ,और दशम  जो कन्द्रे स्थान है | उन्हें विष्णु स्थान माना जाता है  पंचम व नवम भाव को लक्ष्मी स्थान माना जाता है | केन्द्र व त्रिकोण के योग को लक्ष्मी विष्णु योग भी कहते है | जिससे व्यक्ति को अपार धन सम्पत्ति प्राप्त होती है | चल अचल सम्पत्ति भवन ,भूमि व वाहन का अपार सुख मिलता है |ऐसा व्यक्ति सफल नेता ,उच्च अधिकारी या सफल उद्योगपति होता है |

१ .जब नवमेश व दशमेश नवम स्थान में हो तो प्रबल "राजयोग" बनता है
२.यदि नवमेश और दशमेश दोनों दशम में हो तो प्रबल "राजयोग" बनाते है
३.कुंडली में नवम स्थान भाग्य व दशम स्थान कर्म का स्थान है | व्यक्ति अपने कर्म से भाग्य निर्माण करता है



Wednesday, 3 September 2014

राजयोग


अगर किसी की कुंडली में तीन या अधिक गृह उच्च राशि में हो तो व केन्द्र में हो तो वह व्यक्ति राजा या मंत्री बनता है | अगर दो गृह भी उच्च राशि  या स्व राशि में हो तो
व्यक्ति को धन और उच्च पदवी मिलती है | जैसे -मंगल -मेष ,वृश्चिक अथवा मकर का केन्द्र  में हो तो "रुचक योग" बनता है | यदि मिथुन या कन्या राशि में बुध स्थित हो तो
"भद्र योग" बनता है | अगर कर्क या धनु या मीन राशि में  गुरु केन्द्र में हो तो "हंस योग" बनता है |और यदि तुला ,मकर कुम्भ में शनि केन्द्र में हो तो "शश"योग  बनता है |
यदि एक भी गृह उच्च राशि या स्व राशि का हो ओर उस पर मित्र ग्रह की दृष्टी पड़ती हो तो व्यक्ति उच्च अधिकारी एवम धनवान होता है |
यदि लग्नेश बलवान होकर अकेला केन्द्र में हो तो प्रबल योग कारक है |
मकर राशि के अलावा अन्य किसी  राशी में स्थित होकर ब्रहस्पति लगन में हो तो वह उत्तम "राज योग "है |